Mujhe Kehta Jagat Pagal | Hindi Motivational Poem on Society, Problems and Issues

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A Hindi Motivational Poem on society

दोस्तों यह कविता मेरे पिताजी ने 1989 में लिखी थी जब वो अपनी ज़िन्दगी में Struggle रहे थे , कुछ ख़ास करने को था नहीं। पढ़े लिखे होने के बावजूद भी उन्हें जीवन में कोई ख़ास सफलता हाथ नहीं लगी थी। मेरे पापा बी हार्ट एक poet भी थे और हिंदी में पोएट्री किया करते थे।
में आप लोगो से यह कविता शेयर कर रहा हूँ। आशा करता हूँ की यह कविता आप लोगो को पसंद आएगी।

A Hindi Motivational Poem on society

मुझे कहता जगत पागल सखे, मैं गीत गाता हूँ।
कि पीकर जिन्दगी के राग ईर्ष्या द्वेष मद मत्सर
विचरता मस्त पथ पर गुनगुनाता डगमगाता हूँ।
मुझे कहता जगत पागल शराबी मत्त मायावी
कि यह अभिव्यक्ति का अधिकार उनका है
मगर मैं गीत गाता हूँ।

नहीं सौन्दर्य है इसमें नहीं श्रृंगार का पुट है,
गलित ज्वाला अतल से निकल शब्दों को सजाती है।
अनल में घोल कर विष वारूणी अद्भुत बनाता मैं,
मिला कर राग का रस, भाव का मकरन्द
स्वर की सर्करा के संग,
शब्दों को सजा कर
रचा करता छन्द।
मैं कवि हूँ सखे
कविता सुनाता हूँ।
मुझे कहता जगत पागल सखे मैं गीत गाता हूँ।

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सुना अल्लाह ने कब्जा किया भगवान के घर को
किसी ने तोड़ कर मन्दिर वहाँ मस्जिद बनाया था।
कि उस दिन क्रुद्ध उत्तेजित, जनों का महत् वृहत समूह
धुनते माथ, मलते हाथ
घृणा से किटकिटाते दाँत
हिंसा का प्रबल संकल्प
मन में लिए आया था।

समझ पाता नहीं मैं धर्म की इस गूढ़ता को
अन्ध मनुसंतान की इस मूढ़ता को,
स्तब्ध
किंचित चेतना से हीन सा हो कर
व्यथित व्याकुल हुआ जब चित्त
आहें आँसुओं सँग मिलीं बने कवित्त
ज्वाला और जल के समागम से।
आज अपना दर्द वह गाकर सुनाता हूँ।
मुझे कहता जगत पागल सखे मैं गीत गाता हूँ।

वृहत बाजार है दुनिया, सभी सामान बिकते हैं।
सुना है कौड़ियों के भाव में इंसान बिकते हैं।
नियम सिद्धान्त तो कब के यहाँ पर बिक चुके सारे,
कि अब तो बिक रही इज्जत यहाँ ईमान बिकते हैं।
बिकाऊ है यहाँ पर
ज्ञान, गरिमा, और गौरव
सत्य, शुचिता, नीति, निष्ठा, सौख्य, सौरभ,
छल प्रपंचों को मिला दर्जा कला का,
मूल्य जीवन के हुए सब लुप्त
हो कर कुटिलता से युक्त
मानव चुन रहा है स्वयं निज आदर्श रावण, कंस को।

और कहते हैं
नए युग की नई तकनीक
है परिणाम यह विज्ञान के उत्थान का।
मूढ़मति मैं समझ पाता नहीं जब कुछ भी
कभी बेचैन हो कर चीखता हूँ
या कभी चुप बैठ जाता हूँ।
मुझे कहता जगत पागल सखे मैं गीत गाता हूँ।

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